BIJLI MAHADEV

BIJLI MAHADEV

                                                                     

  शिवधाम: बिजली महादेव

Bijli Mahadev Temple Story , How to reach Bijli Mahadev  हिमाचल प्रदेश को देवभूमि के नाम से जाना जाता है। वैसे  प्रदेश में  देवी देवताओं के अनेक मंदिर है। लेकिन कुछ- चमत्कारी मंदिरों की एक अलग पहचान है। उन्ही में से एक चमत्कारिक मंदिर है बिजली महादेव
जी हाँ, कुल्लू घाटी में स्तिथ बिजली महादेव मंदिर। महादेव का यह मंदिर लगभग 2500 मी० की ऊंचाई पर स्तिथ है ।महादेव के इस  मंदिर को बिजली महादेव के नाम से क्यों जाना जाता है?

एक पौराणिक कथा के अनुसार कुल्लांत नाम का एक राक्षस था। जिसका शरीर सांप के आकार का था। जो जीवों को अपना ग्रास बनाता और उपद्रव करता। उसके इस कृत्य से सभी जीव बहुत दुखी थे।

एक बार उसने व्यास नदी का पानी रोक कर सभी जीवो को मारने की योजना बनाई। यह देख कर महादेव बहुत क्रोधित हुए । अपनी माया का प्रयोग कर महादेव ने उस राक्षस का वध कर दिया।

उसका विशालकाय शरीर पहाड़ के रूप में परिवर्तित् हो गया। जिसे कुल्लू के पहाड़- के रूप में जाना जाता है। कहते है उसी कुलांत राक्षस के नाम पर यहाँ का नाम कुल्लू पड़ा है।

कुलांत का वध करने के पश्चात् महादेव ने इंद्रदेव को यहाँ हर 12वर्ष में बिजली गिराने को कहा। महादेव की आज्ञा पाकर इंद्रदेव हर 12 वर्ष में यहाँ बिजली गीराते है ।

तब से इस स्थान को बिजली महादेव के नाम से जाना जाता है । यहाँ भगवन शिव का एक मंदिर है। जिस में भगवन शिव पिंडी के रूप में विराजमान है। यह शिवलिंग मक्खन से निर्मित किया गया है ।

प्रत्येक 12 वर्ष में एक बार यहाँ आकाशीय बिजली गिरती है । जिस के परिणाम स्वरुप यह शिवलिंग खंडित हो जाता है ।मंदिर के पुजारी इस खंडित शिवलिंग के टुकडों को एकत्रित करके फिर से शिवलिंग का निर्माण करते है। और यह अपने पुराने रूप में आ जाता है ।

स्थानीय लोग इसे मक्खन महादेव के नाम से भी पुकारते है । मंदिर परिसर से कुल्लू घाटी का नज़ारा अत्यंत ही मनमोहक दीखता है। यहाँ देश विदेश से श्रदालु एवम् पर्यटक आते है।

यह मंदिर कुल्लू से करीब 14 कि० मी० दूर मथान नामक स्थान पर स्तिथ है।मंदिर के लिए बस या अपनी गाड़ी से चांसरी गाँव तक पहुँच सकते है। तत्पश्चात 3 कि० मी० का सफ़र पैदल ही तय करना पड़ता है ।

ऊंचाई पर स्तिथ होने के कारण यहाँ मौसम ठंडा रहता है और हवाए भी बहुत तेज चलती है। मंदिर पूरी साल खुला रहता है। आप यहाँ कभी भी आ सकते है।


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