हिमाचल प्रदेश एक Tourist Destination राज्य है । यहाँ लोग देश विदेश से घूमने के लिए आते है । पर्यटन उद्योग हिमाचल के लिए वरदान है। पर्यटन उद्योग राज्य के विकास में 10 प्रतिशत का योगदान करता है । पर्यटन के साथ साथ हिमाचल को देव भूमि के नाम से भी जाना जाता है ।

यहाँ पर व्यास ,वशिस्ट, सुखदेव, लोमेश, पराशर तथा मार्कंडेय इत्यादी ऋषियो की तपो भूमि भी है । अनेक देवी देवताओं के मन्दिर होने का गौरव भी प्रदेश को प्राप्त है। वैसे तो हिमाचल का हर स्थान पर्यटन की दृष्टी से रमणीक है परन्तु इस के मुख्य पर्यटन स्थल शिमला , कुल्लू मनाली, डलहौज़ी , चंबा, धर्मशाला , लौहल स्पीती तथा किन्नौर इत्यादी है।

मुख्य पर्यटन स्थल

शिमला

HILLS QUEEN SIMLA

हिमाचल प्रदेश की राजधानी और ब्रिटिश कालीन समय में ग्रीष्‍म कालीन राजधानी शिमला राज्‍य का सबसे महत्‍वपूर्ण पर्यटन केन्‍द्र है। यहां का नाम देवी श्‍यामला के नाम पर रखा गया है जो काली का अवतार है।

शिमला लगभग 7267 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। शिमला एक पहाड़ी पर फैला हुआ है जो करीब 12 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में है।शिमला विश्व का एक महत्त्वपूर्ण पर्यटन स्थल है। यहां प्रत्येक वर्ष देश-विदेश से बड़ी संख्या में लोग भ्रमण के लिए आते हैं।

बर्फ से ढकी हुई यहां की पहाडि़यों में बड़े सुंदर दृश्य देखने को मिलते हैं जो पर्यटकों को बार-बार आने के लिए आकर्षित करते हैं।शिमला में दर्शनीय स्थलों के अतिरिक्त कई अध्ययन केंद्र भी हैं, जिनमें लार्ड डफरिन द्वारा 1884-88 में निर्मित भारतीय उच्च अध्ययन केंद्र बहुत ही प्रसिद्ध है।

यहां कुछ ऐतिहासिक सरकारी भवन भी हैं, जैसे वार्नेस कोर्ट, गार्टन कैसल व वाइसरीगल लॉज ये भी बड़े ही दर्शनीय स्थल हैं। शिमला के पास कुफरी नामक स्थान भी पर्यटकों को आकर्षित करता है । यह स्थल समुद्र तल से 2510 मीटर की ऊँचाई पर स्तिथ है।

कुफरी में ठण्‍ड के मौसम में अनेक खेलों का आयोजन किया जाता है जैसे स्‍काइंग और टोबोगेनिंग । ठण्‍ड के मौसम में यहाँ हर वर्ष खेल कार्निवाल आयोजित किए जाते हैं ।

शिमला के बीचों बीच एक बड़ा और खुला स्थान है जीसे रिज़ के नाम से जाना जाता है । क्राइस्ट चर्च और न्यू-ट्यूडर पुस्तकालय यहाँ के मुखय आकर्षण हैं ।

कुल्लू मनाली

HIDIMBA TEMPLE MANALI

हिमाचल प्रदेश में मनाली एक मुख्य पर्यटन स्थल है। मनाली का नाम मनु के नाम पर पड़ा है। मनाली शहर व्यास नदी के तट पर बसा हुआ है। यहाँ लोग देश विदेश से घूमने के लिए आते है।

मनाली का मौसम ठंडा रहता है। गर्मिओं में राहत पाने के लिए लोग मनाली का रुख करतें है। मनाली का मुख्या आकार्षण हदिम्बा देवी मन्दिर , सोलंग नाला घाटी , मनिकरण, रोहतांग , वशिस्ट तथा नग्गर है। हदिम्बा देवी मन्दिर का इतिहास महाभारत काल से है।

1553 में स्थापित,  राजकुमार भीम की पत्नी हिडिम्बा, जो स्थानिय देवी है, उनको समर्पित हैं। यह मंदिर अपने चार मंजिला शिवालय एवं विलक्षण काठ की कढ़ाई के लिए जाना जाता है।

सोलंग घाटी मुखय मनाली से 13 कि.मीटर के लगभग है। जीसे स्नो पॉइंट के नाम से जाना जाता है। मनिकरण भी मनाली का मुखय आकर्षण केन्द्र है।कुल्लू से करीब 45 किमी दूर मनाली जाने वाले रास्ते में स्थित है और पार्वती नदी के नजदीक अपने गरम पानी के स्त्रोतों के लिए जाना जाता है।

मनिकरण सिखों के धार्मिक स्थल के रूप में भी विख्यात है।मनाली जिला का मुख्यालय कुल्लू में है। यहाँ पहुंचने के लिए सड़क मार्ग तथा वायु मार्ग ( Kullu Airport) साधन है। बरसात (जुलाई -अगस्त ) के महीनो को छोड़कर आप कभी भी मनाली घूमने आ सकते है।

देल्ही, चंड़ीगढ़ से मनाली के लिए निरंतर बसे चलती रहतीं है। चंड़ीगढ़ से मनाली की दूरी लगभग 290 कि मीटर है।

पराशर

PRASHAR LAKE

पराशर झील मंडी जिला के उत्तर में स्तिथ है। मंडी से पराशर झील की सड़क मार्ग से दूरी लगभग 50 k. Mt. है। आप अपने निजी वाहन के द्वारा यहाँ आसानी से पहुंच सकते है। पराशर झील समुद्र तल से लगभग 2700 mtr. की ऊंचाई पर स्तिथ है।

जो लगभग पूरी साल पर्यटन के लिए खुला रहता है। झील के किनारे आकर्षक पैगोडा शैली में निर्मित मंदिर है, जिसे 14 वीं शताब्दी में मंडी रियासत के राजा बाणसेन ने बनवाया था। कहा जाता है कि जिस स्थान पर मंदिर है वहां ऋषि पराशर ने तपस्या की थी।

पराशर आने वाली गाड़ियों को झील से थोड़ा पहले रुकना होता है फिर पैदल ही झील तक पहुंचा जाता है। यहाँ ठहरने के लिए मात्र एक रेस्ट हाउस है।

रिवालसर

REWALSAR

रिवालसर हिंदू, बौद्ध एवं सिख धर्म के अनुयायियों के लिए श्रद्धा का केंद्र है। रिवालसर मंडी जिला से लगभग 24 किलोमीटर दूर सड़क मार्ग से जुड़ा एक प्राचीन तीर्थ है जहाँ एक बड़ा सरोवर और सरोवर के निकट ही गुरु पदम्संभव द्वारा स्थापित ‘मानी-पानी’ नामक बौद्ध मठ और एक गुरुद्वारा भी स्थित है ।

इसे महर्षि लोमेश की तपोभूमि माना जाता है।यहाँ शंकर, लक्ष्मीनारायण और महर्षि लोमश के तीन मंदिर प्रसिद्ध हैं ।यहाँ पर एक भव्य गुरुद्वारा भी है जो गुरु गोविंद सिंह जी की याद में बना है। कहा जाता है कि मुगलों से युद्ध में पहाड़ी राजाओं से मदद मांगने के उद्देश्य से वे यहाँ पधारे थे और तीस दिन तक यहाँ रहे।

मंडी के राजा जोगिंदर सेन ने सन् 1730 में इस गुरुद्वारे का निर्माण कराया। बैसाखी के अवसर पर श्रद्धालु यहाँ स्नान के लिए आते हैं। ऐसा माना जाता है कि मंडी के राजा अर्शधर को जब यह पता चला कि उनकी पुत्री ने गुरु पद्मसंभव से शिक्षा ली है तो उसने गुरु पद्मसंभव को आग में जला देने का आदेश दिया। बहुत बड़ी चिता बनाई गई जो सात दिन तक जलती रही।

इससे वहाँ एक झील बन गई जिसमें से एक कमल के फूल में से गुरु पद्मसंभव एक षोडशवर्षीय किशोर के रूप में प्रकट हुए।

चम्बा डलहोजी

CHAMBA

हिमाचल प्रदेश का चंबा अपने रमणीय मंदिरों और हैंडीक्राफ्ट के लिए सर्वविख्यात है। रवि नदी के किनारे 996 मीटर की ऊंचाई पर स्थित चंबा पहाड़ी राजाओं की प्राचीन राजधानी थी।

चंबा को राजा साहिल वर्मन ने 920 ई. में स्थापित किया था। इस नगर का नाम उन्होंने अपनी प्रिय पुत्री चंपावती के नाम पर रखा। प्राचीन काल की अनेक निशानियां चंबा में देखी जा सकती हैं।यहाँ का चम्पावती मन्दिर मुखय आकर्षणों में एक है।

यह मंदिर राजा साहिल वर्मन की पुत्री को समर्पित है। चौगान चंबा का खुला घास का मैदान है। लगभग 1 किलोमीटर लंबा और 75 मीटर चौड़ा यह मैदान चंबा के बीचों बीच स्थित है। चौगान में प्रतिवर्ष मिंजर मेले का आयोजन किया जाता है।

खजियार चम्बा की सबसे खूबसूरत जगह है।यह चम्बा से 22 कि. मी की दूरी पर है। लाखो की तादाद में हर वर्ष लोग यहाँ घूमने के लिए आते है। यहाँ एक झील है जो की काफी पुरानी है। और जिसका दृश्य लोगों के मन को भाता है।

चंबा सड़क मार्ग से हिमाचल के प्रमुख शहरों व दिल्ली, धर्मशाला और चंडीगढ़ से जुड़ा हुआ है। राज्य परिवहन निगम की बसें चंबा के लिए नियमित रूप से चलती हैं।मणिमहेश झील चंबा जिला के भरमौर  क्षेत्र में 4,080 मीटर (13,390 फ़ुट) की ऊँचाई पर स्थित एक पर्वतीय झील है।

यह मणिमहेश पर्वत के चरणों में स्थित है। हिन्दू आस्था में तिब्बत  की मानसरोवर झील के बाद इसे पवित्र झील माना जाता है। डलहौज़ी एक पहाड़ी स्टेशन है जिस का नाम 19वीं शताब्दी के ब्रिटिश गवर्नर जनरल लॉर्ड डलहौज़ी के नाम पर रखा गया है। यह चम्बा से लगभग 45 k Mt. की दूरी पर है।

 

धर्मशाला

DHARMSALA

धर्मशाला हिमाचल के खूबसूरत स्थानों में से एक है। धर्मशाला काँगड़ा जिला का मुख्यालय भी है ।धर्मशाला काँगड़ा जिला से लगभग 16 k. mtr. की दूरी पर है । धर्मशाला को भारत सरकार के स्मार्ट सिटीज मिशन के अंतर्गत एक स्मार्ट नगर के रूप में विकसित होने वाले सौ भारतीय नगरों में से एक के रूप में भी चुना गया है।

इस के साथ यह प्रदेश की शीतकालीन राजधानी भी है। धर्मशाला के मक्लार्डग़ज  उपनगर में केन्द्रीय तिब्बत प्रशाशन का मुख्यालय भी हैं, और इस कारण यह  दलाई लामा का निवास स्थल तथा निर्वासित तिब्बत सरकार की राजधानी है।

मैक्लॉडगंज का नाम सर डोनाल्ड फ्रील मैक्लॉड जो कि पंजाब के लेफ्टिनेंट गवर्नर थे के नाम पर रखा गया है। समुद्र तल से इसकी औसत ऊंचाई 2,082 मीटर है तथा यह धौलाधार पर्वतश्रेणी में स्थित है।

धर्मशाला  ऐतिहासिक डल झील, खनियारा व कंजार महादेव मेले के लिए जाना जाता है। भागसूनाग, कुणाल पत्थरी व चिन्मन्या जैसे हिन्दुओं के मन्दिर यहां पर स्थित हैं।

HPCA (Himachal Pradesh Cricket Association ) द्वारा निर्मित इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम भी धर्मशाला में बनाया गया है।